Friday, November 29, 2013

प्याज

Ravi Roy
23 अक्टूबर
कल रात मैनें एक सपना देखा . एक बहुत बड़ा सा महल है .उसमें चारो ओर खम्भे हैं . महल के अन्दर ढेर सारे लोग रहते हैं , महल के नीचे प्याज दबा है . महल एक  विदेशी राजा ने बनवाया है .महल दिल्ली में है .इसे आजकल संसद भवन कहते हैं . इसकी खुदाई में एक साल लगेगा .जब साल भर में इस महल को खोद कर इसके नीचे से छिपाया गया प्याज निकाल लेंगे महल गिर जायेगा ,तभी मुल्क में अमन चैन होगा ,प्याज का भाव नीचे आ जायेगा .

चिक्कन यादव कविया गए

इलाहाबाद  में कांग्रेस के एक पोस्टर में सन्देश दिया गया :-
“ मइया अब रहती बीमार
भईया पर बढ़ गया भार
प्रियंका फूलपुर से बनो उम्मीदवार
पार्टी का करो प्रचार
कांग्रेस की सरकार
बनाओ तीसरी बार “

इसे देख कर हमारे घर दूध देने आए
 चिक्कन यादव कविया गए :-

“एक दू तीन चार
लूट खसोट अपरम्पार
देस में फईलल भ्रष्टाचार
लाखन लईके बेरोजगार
महंगाई छाती पर सवार
देसभर में चीख पुकार
पब्लिक रोए जारोजार
अनाचार पापाचार
संसद में जूतमपैजार
चोर डकइतन के भरमार
कतल खून बलत्कार
बोलले पर लाठी के मार
आंसूगैस पानी के बौछार
टूटल टंगड़ी फुटल कपार
बिदेसिअन के बढ़ल व्यापार
चउपट देसी कारोबार
घंटा हिलावत बा सरकार
काठे कठउती केतनी बार ?
भईया बहिनी माई सरदार
दमदो उतार द अबकी बार
जेके देखा उहे उम्मीदवार
नाऊ नाऊ कै गो बार
अगवें गिरी ए सरकार !”

पूजा

पूजा
23 अक्टूबर 2011 पर 04:33 अपराह्न
सुमन को तीसरी बेटी होने की खबर ने बम की तरह कमरे में धमाका किया था . श्रीमती शर्मा ने खुद फोन रिसीव किया और सुमन की सास की जली कटी सुनते ही उनका माथा घूम गया .धम्म से ज़मीन पर बैठ कर माथा कूटने लगीं,
 "हे भगवान् ,ये मुझे किस पाप की सजा दे रहे हो ? हाय रे मेरी सुमन बिटिया .तेरे तो भाग्य ही फूटे हैं रे ! दो- दो लड़कियां पहले से ही होते हुए फिर तीसरी लड़की पैदा हो गयी ! " पास बैठे शर्मा जी ने लपक कर नहीं उठाया होता तो शायद वे वहीँ ज़मीन पर लेट गयी होतीं .शर्मा जी ने सहारा दे कर उन्हें सोफे पर बिठाया .झुंझलाते हुए बोले ,
"ये क्या बेवकूफी है ? पढ़ी लिखी हो . जानती हो कि लड़का या लड़की होना किसी के बस में नहीं . भगवान् को इसमें क्यों घुसेड़ रही हो ?"
"अरे भगवान् को न कहूं तो किसे कहूं ? सब कुछ तो उन्हीं के हाथ में है . इस बार सुमन को बेटा दे दिया होता तो उनका क्या घट जाता ? जरूर हमारे ही किसी पाप की सजा हमारी बेटी को मिल रही है"
"हुंह -तुम और तुम्हारे भगवान." कहते हुए शर्मा जी ने अख़बार उठा लिया और पन्ने पलटने लगे. इन बातों से बेखबर ,घर की नौकरानी कैलाशी ,कोई गाना गुनगुनाते हुए अपनी ही धुन में आयी और मेज पर पड़े जूठे बर्तन बटोरते हुए बोली ,
" अम्मा जी .कल मैं नहीं आऊँगी."
"क्यों " श्रीमती शर्मा ने त्योरियां चढ़ा कर पूछा.
"कल पूजा चढाने जाना है. "
" कैसी पूजा रे ? कल तो कोई त्यौहार नहीं है ."
"मेरी भैंस गाभिन है न .तरकुलही माई को पूजा चढाने से मन की सारी मुराद पूरी हो जाती है .पहले से इसके दो - दो पंडवा हैं . इस बार मईया के आशीर्वाद से अगर पंडिया हो गयी तो बस मजा ही आ जाये अम्मा जी."श्रीमती शर्मा ने अचकचा कर शर्मा जी को देखा तो उन्होंने मुस्कुराते हुए अख़बार के पन्ने में मुंह छिपा लिया .

हे शिक्षक तुम्हें नमन


3 सितंबर 2011 पर 06:28 अपराह्न
(यह कविता चालीस वर्ष पहले डी ए वी इंटर कालेज, गोरखपुर के एक चौदह वर्षीय छात्र ने लिखी थी .)

"हे शिक्षक तुम्हें नमन ,सादर श्रद्धा अर्पण.
तुम मात पिता की गोद से हमको इस दुनियां में लाते हो
दुनियां की टेढ़ी राहों पर हमको चलना सिखलाते हो
तुम ज्ञान का दीप जलाते हो, अँधियारा दूर भगाते हो
हम जीवन में कुछ बन जाएँ ,तुम ऐसी राह दिखाते हो
तुम पर अर्पण तन मन ,हे शिक्षक तुम्हें नमन.

हम सच औ झूठ के अंतर की तुमसे ही शिक्षा पाते हैं
तेरी सीखों से अनुशासन की इक डोरी में बंध जाते हैं
हम पास तुम्हारे रह करके व्यवहार कुशल बन जाते हैं
व्यक्तित्व तुम्हारा सांचा है हम तो उसमें ढल जाते हैं
हम पंक्षी तुम हो गगन ,हे शिक्षक तुम्हें नमन.

हर काल खंड में हर युग में तुमने इतिहास रचाया था
भगवान के शौर्य पराक्रम पर भी गुरु वशिष्ट का साया था
गुरु द्रोण ने ही तो अर्जुन को वह लक्ष्यवेध सिखलाया था
चाणक्य ने इक चरवाहे को सम्राट मगध बनवाया था
जय जय राधाकृष्णन ,हे शिक्षक तुम्हें नमन.

जीवन की कुल उपलब्धि का आधार तुम्हारी शिक्षा है
हम जो कुछ भी बन पाते हैं वह हमको तेरी भिक्षा है
तुम ब्रह्मा हो तुम विष्णु हो, देवों के देव महेश्वर हो
तुम हो साक्षात् परमब्रम्हा , तुमको शत शत है नमन
हे शिक्षक तुम्हें नमन, सादर श्रद्धा अर्पण. "

आज चालीस वर्षों बाद भी जीवन की यह पहली अनगढ़, अधकचरी सी कविता फेसबुक पर पोस्ट करते समय ‘उस छात्र’ की स्मृतियों में प्राथमिक से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के अध्यापकों के चेहरे एक एक कर आते जा रहे हैं. सेंट मैरीज कान्वेंट की मिस पिंटो ,दयानंद शिशु सदन की परमपूज्य अंसारी बहिनजी,चन्द्र मोहिनी ,रतन मंज़री सक्सेना , ,डी ए वी के उमाशंकर बाबू, घनश्याम बहादुर खरे आज़ाद जी ,सेंटएंड्रयूज कालेज की मैडम अचल नंदिनी ,मैडम शर्मा, मैडम नीति ,एम आई खान सर, माईल्स सर , विश्वविद्यालय के प्रो. लाल बचन त्रिपाठी ,एल ए सिंह ,अशोक सक्सेना ,बी डी तिवारी ,मैडम आदेश अग्रवाल ,जे एन लाल ....और भी बहुत से नाम हैं जिनका अगाध स्नेह स्मृतियों में सजीव है. शिक्षक दिवसपर इन सभी को यादकरते हुए यह छात्र कृतज्ञता ज्ञापित करता है. हर वर्ष इसी दिन इन सभी की याद बरबस आयेगी क्योंकि संयोगवश “इस छात्र” का जन्मदिन भी पांच सितम्बर को ही है. अपने जन्म दिन पर स्वर्गीय मातापिता को याद करने के साथ आपका यह मानस पुत्र श्रद्धावनत है.


डिवाइडर



सड़क पर
तेज भागते वाहनों के बीच 
आगे निकलने की होड़ में
गुम हो जाते हैं
सारे कायदे कानून
जहां जगह मिले घुस लो
आगे ,सबसे आगे
निकल लो .

पैदल चलने वाले
बचते जा रहे हैं
बीच सड़क से
हटते जा रहे हैं
किनारे और किनारे,
आओ चलो, पटरी पर  चढ़ें.
सजी धजी दूकानों के बरामदों में
अब यहीं हैं सुरक्षित.
किस किस से बचें,
कहाँ तक लड़ें ?

सड़क के बीचो बीच है
कालीपीली धारियों वाला
डिवाईडर  
अपनी अपनी राह चलो.

सुना है अमरीका में
लोग दाहिने चलते हैं
अपने यहाँ तो
बाएं का ही कायदा है
डिवाइडर से
बड़ा फायदा है.
इधर सुरक्षित ,उधर असुरक्षित
डिवाइडर ने बाँट दी है राह
अपने लिए अपनी राह
बाएं ही सही है
दूसरी राह जो दायें है
गलत है अपने लिए .

सड़क को बाँटते डिवाइडर पर
लगे हैं रंगीन खम्भे
मल्टीनेशनल्स के
रिफलेक्टर ऐड बोर्ड
रात के अँधेरे में
आपकी ही रौशनी
से चमचमाते हैं
बताते हैं
कहाँ है मोड़
कहाँ है रम्बलिंग स्ट्रिप
फ्री रोमिंग ग्लोबल कनेक्टिविटी
अनंत बातें असीम सुविधा
हर पल हर घडी
आपके साथ आपके लिए

बीच राह में है डिवाइडर
रहो अपनी हद में
सीमा में
औकात में
रांग साइड गए
काम से गए
कुचल दिए जाओगे
कानूनन खुद दोषी
वह तो राईट साइड है
ठोंक कर चल देगा .
डिवाइडर से राह में रवानी है
संकरी
मगर रंगीन
हो गयी है सड़क.







इष्टदेव सांकृत्यायन की फेस बुक वाल से




23 अक्टूबर 2013
मेरे पिछले पोस्ट पर भाई Ravi Roy जी का एक कमेंट. संदर्भ के लिए आपको बता दूं, गिरधरगंज गोरखपुर शहर का एक मोहल्ला है. ध्यान रहे, दिल्ली-एनसीआर में अचार की दशा भी ठीकठाक नहीं है. फिलहाल भाई रवि राय जी की बात पर ग़ौर फ़रमाएं :

" इष्टदेव भाई ,एकदम सही घटना बता रहा हूँ ,कल शाम को पत्नी के साथ टाऊनहाल में बुकफेयर देखने गया था . लौटते समय गिरधरगंज के सब्जी मार्केट में रुक गया .आपको पता ही होगा कि आस पास अनेक नई कालोनियां बनजाने से गिरधरगंज अब शहर का एक बहुत बड़ा केंद्र हो चुका है. हमारे बगल में खड़े एक अन्य दम्पति भी पहले से ही सब्जियां ले रहे थे .पत्नी अच्छी अच्छी हरी सब्जियां गोभी,टमाटर ,करेला ,भिन्डी आदि छांट छांट कर रख रही थीं .सारी सब्जी उन्होंने तौलवा कर झोले में रखली .पैसा भी दे दिया. उनके हटने के बाद हमलोग अपने लिए सब्जी लेने लगे .अभी हम वहाँ से हटने ही वाले थे कि वही दम्पति पुनः वापस आ गया. पतिदेव झोले की सारी सब्जी दुकानदार के सामने उलट कर बोले " ये सब अपना सामान वापस ले लो और मेरा पैसा दे दो." दुकानदार से बहस होने लगी ,वह वापस लेने को तैयार नहीं हो रहा था ." अभी आप इतना छांट बीन कर ले गए -कुछ खराब हो तो बताइए ,आखिर मैं क्यों वापस लूं ? " तू तू मैं मैं होने लगी . पति महोदय का कहना था कि इन सब्जियों को बनाने के लिए कम से कम दो तीन किलो प्याज चाहिए. अस्सी रुपये किलो प्याज है . कहाँ से लाऊँ .इतनी महँगी सब्जी खाने से तो अच्छा है कि अचार से ही काम चला लेंगे .पत्नी झिझक की मारी दूर खड़ी थी . उसे इतनी ग्लानि हुई कि वहीँ बुक्का फाड़ कर रोने लगी.पास ख़ड़ी अन्य महिलाएं उसे घेर कर चुप कराने लगीं मगर खुद रुआंसी हो गयीं .करवा चौथ का व्रत भी था .देखते ही देखते वहीँ महामहिला सम्मलेन शुरू हो गया .सारे पति भकुआए खड़े थे .महिलाओं ने निर्णय लिया और ,आप शायद विश्वास नहीं करेंगे,सारी महिलाओं ने अपनी खरीदी सब्जियां दुकानदारों के सामने उलट दिया . नहीं खायेंगे सब्जी , जबतक प्याज का दाम सही नहीं होगा हम लोग अब अचार से ही काम चला लेंगे .प्याज तो किसी भी हालत में लेना ही नहीं है . सारे दूकानदार घबरा गए , पचास रुपये तक भाव तुरंत आ गया .मगर एक बार तय हो गया तो एक भी आदमी प्याज खरीदने नहीं गया .आलू सोलह रुपया है प्याज भी सोलह रुपये किलो दो तभी लेंगे .मैनें अपनी आँखों से देखा .फोन पर बात करते हुए - चालीस रुपये तक का भाव बताते हुए .जो सामने है बेच डालो .अब प्याज का व्यापार करना बंद .जब हालत सही होगी तब फिर देखेंगे . ये हालत है. देश का वाणिज्य मंत्री स्वीकार भी कर रहा है कि मुनाफाखोरों ने प्याज का स्टाक होल्ड कर दिया है . इसके कारण दाम बढे हुए हैं .अबे -तो इसे रोकेगा कौन ? सच कहता हूँ इष्टदेव भाई .देश का यही हाल है ,प्याज महंगा हो गया -प्याज खाना छोड़ दो , बिजली महँगी हो गयी - बिजली कम जलाओ , डकैती बढ़ गयी - संपत्ति मत रक्खो ,बलात्कार बढ़ गया - बहन बेटियों को घर में बंद करके रक्खो ,तालिबान क्या सिर्फ अफगानिस्तान में ही हैं ? अंत में बता दूं.कल रात से मेरे घर में भी सब्जी बंद है .अचार खा खा कर जैसे विचार बन रहे है लिख रहा  हूँ भाई."

नोटा – पब्लिक के हाथ में सोंटा


29 सितंबर 2013 पर 07:50 अपराह्न
सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता के हाथ में “नोटा” यानि NONE OF THE ABOVE  का अधिकार थमा कर एक ऐतिहासिक फैसला किया है . RIGHT TO REJECT के नाम से जाने जा रहे इस फैसले के अनुसार अब मतदान की मशीन में सारे प्रत्याशियों के लिए निर्धारित बटनों  के अलावा एक और बटन होगा जिसके दबाने का  सीधा अर्थ होगा कि मतदाता को वर्तमान प्रत्याशियों में से एक भी प्रत्याशी इस लायक नहीं लगा जिसे वह अपना रहनुमा बना सके. यह "राइट टू रिजेक्ट" का विकल्प मतदाता को उस स्थिति में मदद करेगा जब सारे के सारे नालायकों में से कम नालायक को चुनने की मजबूरी आ जाती है. तब मतदाता को या तो झख मारकर किसी नालायक को चुनना ही होता है या फिर वह वोट डालने ही नहीं जाता. यह एक ऐसा तरीका  है जिसे लागू करने पर निर्वाचित प्रत्याशियों की गुणवत्ता बढ़ेगी और मतदान का प्रतिशत भी बढेगा. नोटा के रूप  में सुप्रीमकोर्ट ने सामान्य जनता के हाथ में एक ऐसा सोंटा थमा दिया है जिसे सही ढंग से फटकार कर राजनीतिक जानवरों को काबू किया जा सकता है .कम से कम एक आशा की किरण तो दिखती है .
यहाँ बात को स्पष्ट करने के लिए वर्ष 2009 के आम चुनाव के कुछ चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत कर रहा हूँ .पंद्रहवीं लोकसभा के लिए हुए इस चुनाव में 71.70 करोड़ मतदाताओं में से केवल 41.7 करोड़ लोगों ने मतदान किया अर्थात 58.19 प्रतिशत. इसमें यूपी की स्थिति यह थी कि कुल 11.60 करोड़ मतदाताओं में से मात्र 5.54 करोड़ अर्थात 47.78 प्रतिशत लोगों ने ही वोट डाले.इस चुनाव में हमारे माननीय 543 निर्वाचित सांसदों में सेमात्र 95 ही ऐसे लोकप्रिय निकले जिन्हें कुल मतदान का 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल हुआ जबकि यूपी में मात्र 8 प्रत्याशी ही 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल कर पाए. यदि हम चुनाव क्षेत्र के समस्त मतदाता संख्या के सापेक्ष देखें तो 380 प्रत्याशियों ऩे अपने चुनाव क्षेत्र के मात्र 30 प्रतिशत वोट हासिल करके भी मैदान मार लिया और आज देश का संविधान नियंत्रित कर रहे हैं. आप को संभवतः यह जान कर आश्चर्य होगा कि य़ू पी की 80 सीटों में से 77 सीटों पर विजयी प्रत्याशियों ऩे अपने क्षेत्र के कुल मतदाताओं में से मात्र 30 प्रतिशत का ही विश्वास हासिल किया .बिहार की तो सभी 40 सीटों पर विजयी प्रत्याशियों का यही हाल रहा जहाँ 2 प्रत्याशी 10 प्रतिशत से भी कम,29 प्रत्याशी 10 से 20 प्रतिशत के बीच और 9 प्रत्याशी 21 से 30 प्रतिशत के बीच वोट पाकर आज संसद भवन में बैठे हैं.
यदि राष्ट्रीय पार्टियों के सन्दर्भ में देखें तो पता चलता है कि विगत लोकसभा के चुनाव में सफल उम्मीदवारों के रूप में कुल मतदान का कांग्रेस के प्रत्याशियों ने 28.55 प्रतिशत ,भाजपा ने 18.80 प्रतिशत ,बसपा ने 6.17 प्रतिशत माकपा ने 5.33 प्रतिशत और भाकपा ने 1.43 प्रतिशत वोट हासिल किये .कुल पंजीकृत मतदाता संख्या के सापेक्ष यह स्थिति इस प्रकार रही -कांग्रेस 16 .61 प्रतिशत, भाजपा 10 .94 प्रतिशत, बसपा 3.59 प्रतिशत,माकपा 3.10 प्रतिशत और भाकपा 0.83 प्रतिशत .
स्पष्ट है कि वतर्मान चुनाव व्यवस्था में  परिवर्तन अब देश की लोकतान्त्रिक व्यवस्था को बनाये रखने के लिए आवश्यक है. ईमानदार और लोकसेवा के प्रति निष्ठावान लोगों को राजनीति में लाना और घोटालेबाजों को बाहर करना " राइट टू रिजेक्ट " से ही संभव लग रहा है."