Friday, November 29, 2013

इष्टदेव सांकृत्यायन की फेस बुक वाल से




23 अक्टूबर 2013
मेरे पिछले पोस्ट पर भाई Ravi Roy जी का एक कमेंट. संदर्भ के लिए आपको बता दूं, गिरधरगंज गोरखपुर शहर का एक मोहल्ला है. ध्यान रहे, दिल्ली-एनसीआर में अचार की दशा भी ठीकठाक नहीं है. फिलहाल भाई रवि राय जी की बात पर ग़ौर फ़रमाएं :

" इष्टदेव भाई ,एकदम सही घटना बता रहा हूँ ,कल शाम को पत्नी के साथ टाऊनहाल में बुकफेयर देखने गया था . लौटते समय गिरधरगंज के सब्जी मार्केट में रुक गया .आपको पता ही होगा कि आस पास अनेक नई कालोनियां बनजाने से गिरधरगंज अब शहर का एक बहुत बड़ा केंद्र हो चुका है. हमारे बगल में खड़े एक अन्य दम्पति भी पहले से ही सब्जियां ले रहे थे .पत्नी अच्छी अच्छी हरी सब्जियां गोभी,टमाटर ,करेला ,भिन्डी आदि छांट छांट कर रख रही थीं .सारी सब्जी उन्होंने तौलवा कर झोले में रखली .पैसा भी दे दिया. उनके हटने के बाद हमलोग अपने लिए सब्जी लेने लगे .अभी हम वहाँ से हटने ही वाले थे कि वही दम्पति पुनः वापस आ गया. पतिदेव झोले की सारी सब्जी दुकानदार के सामने उलट कर बोले " ये सब अपना सामान वापस ले लो और मेरा पैसा दे दो." दुकानदार से बहस होने लगी ,वह वापस लेने को तैयार नहीं हो रहा था ." अभी आप इतना छांट बीन कर ले गए -कुछ खराब हो तो बताइए ,आखिर मैं क्यों वापस लूं ? " तू तू मैं मैं होने लगी . पति महोदय का कहना था कि इन सब्जियों को बनाने के लिए कम से कम दो तीन किलो प्याज चाहिए. अस्सी रुपये किलो प्याज है . कहाँ से लाऊँ .इतनी महँगी सब्जी खाने से तो अच्छा है कि अचार से ही काम चला लेंगे .पत्नी झिझक की मारी दूर खड़ी थी . उसे इतनी ग्लानि हुई कि वहीँ बुक्का फाड़ कर रोने लगी.पास ख़ड़ी अन्य महिलाएं उसे घेर कर चुप कराने लगीं मगर खुद रुआंसी हो गयीं .करवा चौथ का व्रत भी था .देखते ही देखते वहीँ महामहिला सम्मलेन शुरू हो गया .सारे पति भकुआए खड़े थे .महिलाओं ने निर्णय लिया और ,आप शायद विश्वास नहीं करेंगे,सारी महिलाओं ने अपनी खरीदी सब्जियां दुकानदारों के सामने उलट दिया . नहीं खायेंगे सब्जी , जबतक प्याज का दाम सही नहीं होगा हम लोग अब अचार से ही काम चला लेंगे .प्याज तो किसी भी हालत में लेना ही नहीं है . सारे दूकानदार घबरा गए , पचास रुपये तक भाव तुरंत आ गया .मगर एक बार तय हो गया तो एक भी आदमी प्याज खरीदने नहीं गया .आलू सोलह रुपया है प्याज भी सोलह रुपये किलो दो तभी लेंगे .मैनें अपनी आँखों से देखा .फोन पर बात करते हुए - चालीस रुपये तक का भाव बताते हुए .जो सामने है बेच डालो .अब प्याज का व्यापार करना बंद .जब हालत सही होगी तब फिर देखेंगे . ये हालत है. देश का वाणिज्य मंत्री स्वीकार भी कर रहा है कि मुनाफाखोरों ने प्याज का स्टाक होल्ड कर दिया है . इसके कारण दाम बढे हुए हैं .अबे -तो इसे रोकेगा कौन ? सच कहता हूँ इष्टदेव भाई .देश का यही हाल है ,प्याज महंगा हो गया -प्याज खाना छोड़ दो , बिजली महँगी हो गयी - बिजली कम जलाओ , डकैती बढ़ गयी - संपत्ति मत रक्खो ,बलात्कार बढ़ गया - बहन बेटियों को घर में बंद करके रक्खो ,तालिबान क्या सिर्फ अफगानिस्तान में ही हैं ? अंत में बता दूं.कल रात से मेरे घर में भी सब्जी बंद है .अचार खा खा कर जैसे विचार बन रहे है लिख रहा  हूँ भाई."

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