Friday, November 29, 2013

हे शिक्षक तुम्हें नमन


3 सितंबर 2011 पर 06:28 अपराह्न
(यह कविता चालीस वर्ष पहले डी ए वी इंटर कालेज, गोरखपुर के एक चौदह वर्षीय छात्र ने लिखी थी .)

"हे शिक्षक तुम्हें नमन ,सादर श्रद्धा अर्पण.
तुम मात पिता की गोद से हमको इस दुनियां में लाते हो
दुनियां की टेढ़ी राहों पर हमको चलना सिखलाते हो
तुम ज्ञान का दीप जलाते हो, अँधियारा दूर भगाते हो
हम जीवन में कुछ बन जाएँ ,तुम ऐसी राह दिखाते हो
तुम पर अर्पण तन मन ,हे शिक्षक तुम्हें नमन.

हम सच औ झूठ के अंतर की तुमसे ही शिक्षा पाते हैं
तेरी सीखों से अनुशासन की इक डोरी में बंध जाते हैं
हम पास तुम्हारे रह करके व्यवहार कुशल बन जाते हैं
व्यक्तित्व तुम्हारा सांचा है हम तो उसमें ढल जाते हैं
हम पंक्षी तुम हो गगन ,हे शिक्षक तुम्हें नमन.

हर काल खंड में हर युग में तुमने इतिहास रचाया था
भगवान के शौर्य पराक्रम पर भी गुरु वशिष्ट का साया था
गुरु द्रोण ने ही तो अर्जुन को वह लक्ष्यवेध सिखलाया था
चाणक्य ने इक चरवाहे को सम्राट मगध बनवाया था
जय जय राधाकृष्णन ,हे शिक्षक तुम्हें नमन.

जीवन की कुल उपलब्धि का आधार तुम्हारी शिक्षा है
हम जो कुछ भी बन पाते हैं वह हमको तेरी भिक्षा है
तुम ब्रह्मा हो तुम विष्णु हो, देवों के देव महेश्वर हो
तुम हो साक्षात् परमब्रम्हा , तुमको शत शत है नमन
हे शिक्षक तुम्हें नमन, सादर श्रद्धा अर्पण. "

आज चालीस वर्षों बाद भी जीवन की यह पहली अनगढ़, अधकचरी सी कविता फेसबुक पर पोस्ट करते समय ‘उस छात्र’ की स्मृतियों में प्राथमिक से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के अध्यापकों के चेहरे एक एक कर आते जा रहे हैं. सेंट मैरीज कान्वेंट की मिस पिंटो ,दयानंद शिशु सदन की परमपूज्य अंसारी बहिनजी,चन्द्र मोहिनी ,रतन मंज़री सक्सेना , ,डी ए वी के उमाशंकर बाबू, घनश्याम बहादुर खरे आज़ाद जी ,सेंटएंड्रयूज कालेज की मैडम अचल नंदिनी ,मैडम शर्मा, मैडम नीति ,एम आई खान सर, माईल्स सर , विश्वविद्यालय के प्रो. लाल बचन त्रिपाठी ,एल ए सिंह ,अशोक सक्सेना ,बी डी तिवारी ,मैडम आदेश अग्रवाल ,जे एन लाल ....और भी बहुत से नाम हैं जिनका अगाध स्नेह स्मृतियों में सजीव है. शिक्षक दिवसपर इन सभी को यादकरते हुए यह छात्र कृतज्ञता ज्ञापित करता है. हर वर्ष इसी दिन इन सभी की याद बरबस आयेगी क्योंकि संयोगवश “इस छात्र” का जन्मदिन भी पांच सितम्बर को ही है. अपने जन्म दिन पर स्वर्गीय मातापिता को याद करने के साथ आपका यह मानस पुत्र श्रद्धावनत है.


No comments:

Post a Comment