Friday, November 29, 2013

नोटा – पब्लिक के हाथ में सोंटा


29 सितंबर 2013 पर 07:50 अपराह्न
सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता के हाथ में “नोटा” यानि NONE OF THE ABOVE  का अधिकार थमा कर एक ऐतिहासिक फैसला किया है . RIGHT TO REJECT के नाम से जाने जा रहे इस फैसले के अनुसार अब मतदान की मशीन में सारे प्रत्याशियों के लिए निर्धारित बटनों  के अलावा एक और बटन होगा जिसके दबाने का  सीधा अर्थ होगा कि मतदाता को वर्तमान प्रत्याशियों में से एक भी प्रत्याशी इस लायक नहीं लगा जिसे वह अपना रहनुमा बना सके. यह "राइट टू रिजेक्ट" का विकल्प मतदाता को उस स्थिति में मदद करेगा जब सारे के सारे नालायकों में से कम नालायक को चुनने की मजबूरी आ जाती है. तब मतदाता को या तो झख मारकर किसी नालायक को चुनना ही होता है या फिर वह वोट डालने ही नहीं जाता. यह एक ऐसा तरीका  है जिसे लागू करने पर निर्वाचित प्रत्याशियों की गुणवत्ता बढ़ेगी और मतदान का प्रतिशत भी बढेगा. नोटा के रूप  में सुप्रीमकोर्ट ने सामान्य जनता के हाथ में एक ऐसा सोंटा थमा दिया है जिसे सही ढंग से फटकार कर राजनीतिक जानवरों को काबू किया जा सकता है .कम से कम एक आशा की किरण तो दिखती है .
यहाँ बात को स्पष्ट करने के लिए वर्ष 2009 के आम चुनाव के कुछ चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत कर रहा हूँ .पंद्रहवीं लोकसभा के लिए हुए इस चुनाव में 71.70 करोड़ मतदाताओं में से केवल 41.7 करोड़ लोगों ने मतदान किया अर्थात 58.19 प्रतिशत. इसमें यूपी की स्थिति यह थी कि कुल 11.60 करोड़ मतदाताओं में से मात्र 5.54 करोड़ अर्थात 47.78 प्रतिशत लोगों ने ही वोट डाले.इस चुनाव में हमारे माननीय 543 निर्वाचित सांसदों में सेमात्र 95 ही ऐसे लोकप्रिय निकले जिन्हें कुल मतदान का 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल हुआ जबकि यूपी में मात्र 8 प्रत्याशी ही 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल कर पाए. यदि हम चुनाव क्षेत्र के समस्त मतदाता संख्या के सापेक्ष देखें तो 380 प्रत्याशियों ऩे अपने चुनाव क्षेत्र के मात्र 30 प्रतिशत वोट हासिल करके भी मैदान मार लिया और आज देश का संविधान नियंत्रित कर रहे हैं. आप को संभवतः यह जान कर आश्चर्य होगा कि य़ू पी की 80 सीटों में से 77 सीटों पर विजयी प्रत्याशियों ऩे अपने क्षेत्र के कुल मतदाताओं में से मात्र 30 प्रतिशत का ही विश्वास हासिल किया .बिहार की तो सभी 40 सीटों पर विजयी प्रत्याशियों का यही हाल रहा जहाँ 2 प्रत्याशी 10 प्रतिशत से भी कम,29 प्रत्याशी 10 से 20 प्रतिशत के बीच और 9 प्रत्याशी 21 से 30 प्रतिशत के बीच वोट पाकर आज संसद भवन में बैठे हैं.
यदि राष्ट्रीय पार्टियों के सन्दर्भ में देखें तो पता चलता है कि विगत लोकसभा के चुनाव में सफल उम्मीदवारों के रूप में कुल मतदान का कांग्रेस के प्रत्याशियों ने 28.55 प्रतिशत ,भाजपा ने 18.80 प्रतिशत ,बसपा ने 6.17 प्रतिशत माकपा ने 5.33 प्रतिशत और भाकपा ने 1.43 प्रतिशत वोट हासिल किये .कुल पंजीकृत मतदाता संख्या के सापेक्ष यह स्थिति इस प्रकार रही -कांग्रेस 16 .61 प्रतिशत, भाजपा 10 .94 प्रतिशत, बसपा 3.59 प्रतिशत,माकपा 3.10 प्रतिशत और भाकपा 0.83 प्रतिशत .
स्पष्ट है कि वतर्मान चुनाव व्यवस्था में  परिवर्तन अब देश की लोकतान्त्रिक व्यवस्था को बनाये रखने के लिए आवश्यक है. ईमानदार और लोकसेवा के प्रति निष्ठावान लोगों को राजनीति में लाना और घोटालेबाजों को बाहर करना " राइट टू रिजेक्ट " से ही संभव लग रहा है."

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