Friday, November 29, 2013

गदहा पुराण



बात पुरानी है . एक मुल्क था . मुल्क का एक शहंशाह था .  शहंशाह के मुल्क में कोई भूखा नहीं सोता था.  जिसे भरपेट खाना मिल जाता था बस वही चैन से सोता था.
         शहंशाह समाजवादी विचारधारा का था . शहंशाह  के  कपडे पेरिस में सिलते, लंदन में धुलते  ,  जूते  मास्को में पालिश होते  , शहंशाह बाल कटवाने अमेरिका जाता . शहंशाह  की एक शहजादी   थी .शहजादी का विवाह नहीं हो पाया . शहजादी की कुंडली में दोष था .  कोई लड़का नहीं मिला .तभी एक पहुंचे हुए संत मुल्क में पधारे .शहंशाह ने सुना तो खुद उनके दर्शन करने पहुंचा. अपनी समस्या संतजी  को बताई . संतजी बोले,
शहजादी   की  कुंडली में नागिन योग है. इसका विवाह महल के पिछवाड़े धोबी टोले में धन्नू धोबी के खूंटे से बंधे फारसी गदहे से होगा .”
 शहंशाह समाजवादी था . आदमी  गदहा एक समान. शहजादी की शादी गदहे से करने के लिए राजी. सिपाहियों  ने गदहे को  कब्ज़े में ले लिया. महल में  गदहा लगा रेंकने  ,  अफरा तफरी मच गयी .शहंशाह ने संतजी से  कोई उपाय करने की गुजारिश  की . संत  बोले,
 हम  अपने तपोबल से इसे अभी आदमी बना देते हैं  मगर यह रात में फिर गदहा बन जायेगा . अपने पूरे जीवन काल में ऐसे ही यह रोज  दिन में आदमी रात में गदहा बनता रहेगा .”
 मगर , शाही दामाद रात बिरात   क्या महल में  रेंकते  रहेंगे ? “
देखो वत्स ,  अपना सारा तपोबल एकत्रित  करके अभी तो हम  बस यही कर सकते हैं  कि दामादजी की दो पीढ़ी तक चीपों चीपों बंद रहेगा मगर इसके बाद तीसरी पीढ़ी से यह फिर चालू हो जायेगा. ”

शहंशाह समाजवादी था . सोचा कि कम से कम सात पीढ़ी तक तो अपने समाजवादी खानदान  का राज रहेगा ही .दो पीढ़ी के बाद जनता जनार्दन चीपों चीपों सुन ही लेगी तो क्या हुआ ? समाजवादी व्यवस्था में जनता को आखिरकार इतना तो एडजेस्ट करना ही पड़ता है  ! बोला ,
जो आपकी इच्छा संतजी ,मुझे सब मंजूर है .अब किसी तरह शहजादी की शादी कराइए महराज 
गदहे के साथ शहजादी   का  विवाह हो गया .दामादजी दिन भर आदमी बने रहते.  रात में गदहा बन जाते . शहजादी   के  दो शहजादे  हुए . कालांतर में शाही दामाद खुदा को प्यारे हुए  .शहंशाह  जन्नतनशीन  हो गए .शहजादी गद्दीनशीन हुई .  शाही तख़्त पर बैठी .मलिका ने अपने  दोनों शहजादोंबड़कू और छोटकूका  बड़े प्यार दुलार से पालन पोषण किया. बडकू आसमान में उड़ने का शौक़ीन . हवाई जहाज उड़ाने लगा .  छोटकू तेज रफ़्तार का शौक़ीन , मोटर दौडाने लगा .छोटकू  शहजादे  ने एक दिन अपनी माँ   से कहा ,
मम्मी.   मैं भी आसमान में जाऊँगा . हवाई जहाज उड़ाऊंगा.”
माँ  ने बहुत मना  किया मगर छोटकू नहीं  माना. जहाज ले कर आसमान में उड़ गया . दुर्घटना हो गयी और छोटकू परलोकवासी  हो गया .  मलिकाएआजम को शाही  सिपाहियों ने ही एक दिन टपका दिया .ला मुहाला, बडकू  शाही तख़्त पर गद्दीनशीन हुआ . एक दिन बडकू षड्यंत्र का  शिकार हो गया  . राज करने वाला हवाबाजी में गया. हवाबाजी करने वाला राज करने में गया . दो पीढियां नहीं रहीं .तीसरी पीढ़ी के शहजादे पर  संतवचन का असर होने लगा . शहजादा आस्तीन चढ़ा चढ़ा कर  रेंकने  लगा  . शहजादा शाही तख़्त पर गद्दीनशीन होने के लिए हाथ पैर फेंकने लगा.
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