किसी ने कहा
कविता लिखना बैंकखाता खोलने से ज्यादा मुश्किल है .
अब है तो है, हो भी सकता है.
बैंक खाते में सिर्फ पैसा है
कविता में धूप है चांदनी है हवा है बारिश है
प्यार है,तकरार है,मिलन की गुजारिश है.
विचार है विमर्श है समस्याएँ हैं संघर्ष है
........ दिल है
निश्चित रूप से नहीं कह सकता - प्रश्न जटिल है
दोनों में कौन सा काम वाकई ज्यादा मुश्किल है .
मेरा किसी बड़े बैंक में खाता नहीं
रहा सवाल कविता का , ये काम मुझे आता नहीं .
कुछ दिनों पहले खाता खुलवाने बैंक चला गया
पहली ही पायदान पर छला गया.
सामने खड़ा होते ही स्वागतबाला ने "हाय डार्लिंग" बोल दिया
मैंने भी झोल दिया - "क्या कहती हैं कोई सुनेगा तो क्या कहेगा,ऐसा कैसेचलेगा ?
वैसे .....चलिए बता दीजिये, कहाँ रहती हैं पता दीजिये."
ओस में भीगे गुलाब की पंखुरियों से लरजते होंठों के घूंघट में से झलकती
अनारदाने जैसी धवल दंतपंक्तियां
कचकचाकर पीसती
कान पर लगा ब्लूटूथ रिसीवर खींचती
चीखी,"शटअप ईडियट. आयम नॉट टाकिंग टू यू"
मोबाईल बंद कर, मुस्करा कर बोली
"यस सर वाट कैन आई डू फार यू."
"खाता खोलना है"
वही मुस्कान
"उद्दिर को जाने का, लेफ्ट को मारने का - देन
काउंटर नम्बर फोट्टी टू वाली लेन
लेन में लगने का....बरोबर"
कुछ समझ में नहीं आया सब गुड़गोबर.
रिरिआया "जी कृपा करके बता दीजिये
कौन -कौन से प्रमाणपत्र चाहिए समझा दीजिये."
"पट्र....बोले तो ?"
मैं फिर घिघिआया "खाता खोलें तो"
दन्तघर्षणी उत्तर मिला
"काउंटर नंबर फोट्टी टू ,गो"
मेरे पीछे खड़े न जाने किसे संबोधित करती वही मुस्कान
'यस सर , वाट कैन आई डू फार यू. "
(2)
काउंटर नंबर फोट्टी टू
लाइन लगाया नंबर आया,इस बार नहीं घबराया.
मोटे लेंस का चश्मा लगाये पचास साल के रौबदार चेहरे वाले बाबू से सवाल दुहराया
" खाता खोलना है, इतना बता दीजिये, कौन -कौन से प्रमाणपत्र चाहिए, समझा दीजिये."
बाबू ने पूरा-आधे मिनट तक मुझे घूरा "कैसा खाता ?"
"जी वही ...जो बैंक में खुलता है"
"सेविंग कि करेंट"
मैं भकुआ गया
पता नहीं पैसा जमा करने में
कहाँ से करेंट कैसा करेंट
कान्फिडेंस से बोला "जी परमानेंट."
बाबू ने एक फार्म थमा दिया"काउंटर नंबर टू"
फिर वही जापान से टिम्बकटू.
हाथ में फार्म लेकर उल्टा - पलटा,पढ़ा
कुछ पल्ले नहीं पड़ा
हाल में निगाह दौड़ाई - लोग आ रहे थे जा रहे थे पढ़ रहे थे लिख रहे थे,
सभी कुछ न कुछ करते ही दिख रहे थे .
नोट सरिया रहे थे
डीजल पेट्रोल के दाम, गन्ने की पर्ची, खाद के लिये कोहराम,
केंद्र सरकार- ममता का वार, इम्तिहान- पर्चा आउट
संसद में एफ डी आई पर मतदान-वाकआउट
युगल गान - लौंडा बदनाम हुआ नसीबन तेरे लिए -मैं झंडू बाम हुई , डार्लिंग तेरे लिए
लोग गरिया रहे थे.
प्रेमी युगल की हत्या,आनर किलिंग, मूंछ की समस्या
लोग बतिया रहे थे
लोग अभ्यस्त थे,हर काउंटर व्यस्त थे
सचिन की सौवीं सेंचुरी, अडवानी की यात्रा,स के उप्पर ओ ,न पर छोटी इ ,य पर आ की मात्रा .
अन्ना हजारे ,केजरीवाल,ब्याज की दरों में वृद्धि,शेयरों में गिरावट,मार्केट का हाल.
वोटर कार्ड,क्रेडिट कार्ड,आधार कार्ड,स्मार्ट कार्ड,वाल मार्ट
लोग बतिया रहे थे
दिल्ली की बस में बेबस लड़की से बलात्कार ,
वी वांट जस्टिस -रायसीना पर आतंकित बच्चों का चीत्कार
पानी की बौछार ,लाठी का वार ,लोकतंत्र का सरकारी बलात्कार
जनगण को मनभर अधिनायक लतिया रहे थे
बातें हैं कि ख़तम ही नहीं होतीं,काम है कि शुरू ही नहीं होता
गुब्बारे में हवा भरती जा रही है,देश की अर्थव्यवस्था फलफूल रही है,
जनता बकलोल है, झूलाझूल रही है
रघुपति राघव राजा राम- राजघाट पर मुक्तिधाम,
दिमागी बुखार से बच्चे मच्छरों की तरह मर रहे हैं
"परिंदा भी पर नहीं मार सकता -हम इंतज़ाम कर रहेहैं "
सूबे को एक सौ साठ अरब की सौगात,राजा की आयेगी बारात
हथिया नक्षत्र -भारी बरखा ,पहले हम -फिर तू खा
पंचकोटि महामनी- कौन बनेगा करोडपति.सौ करोड़ का रावण
मन रे -तू काहे न धीर धरे ,कोई गीत सुना -कुछ गुनगुना
मन रे ..... गा
नाच मेरी बुलबुल पैसा मिलेगा,कहाँ कदरदान तुझे ऐसा मिलेगा
साल में सौ दिन काम मिलेगा,काम का पूरा दाम मिलेगा.
परधान जी,कइसे काम होगा ?
अबे गदहे की दुम- आधा हम आधा तुम,कागज पर दस्तखत- कागज पर काम
पता न पाए सीताराम. बोलो पट्टू, राम राम.
(3)
" हैल्लो ... अंकल तबियत तो ठीक है ?"
मोबाईल ,हेडफोन लैपटॉपधारी युवक सामने खड़ा था
मेरे हाथ में फार्म अभी यूँ ही पड़ा था
"खाता खोलने का है?"
मेरी अचकचाई मुंडी हिलते ही ,समझ गया -मेरी हाँ है
कलम निकाला ,नाम पता पूछ कर फटाफट फार्म भरडाला
मैं कृतकृत्य हो गया ,ये है होनहार पीढ़ी -समाज और देश के प्रति संवेदनशील
बड़ों की इज्ज़त ज़रुरतमंद की मदद ,वह वा ...... वह वा ,क्या संस्कार है
देखिये ,पढ़ने लिखने से बहुत अंतर पड़ता है सेवाभावना जागृत होती है
आज इसी की दरकार है .
फार्म भर गया- मैं भी जैसे पुनः सम्हर गया
युवक ने मेरा हस्ताक्षर लिया ,लैपटॉप खोला , वेबकैम क्लिक किया
फोटो खींची,दो मिनट में सब दुरुस्त
"अंकलजी , डाकूमेंट "
मैंने मुंह बा दिया "अरे बेटा - - -अभी तो सिर्फ पता करने आया था"
"कोई बात नहीं अंकल- पासपोर्ट ,पैन कार्ड, सैलेरी स्लिप, ड्राइविंग लाइसेंस, गुड हेल्थ सर्टिफिकेट
लेकर आ जाना,फटाफट फ़ाइनल हो जायेगा झटाझट चले जाना
अब्बी आओ बाहर को छोड़ दूं"
मेरे हाथ पकड़े, भीड़ में रास्ता बनाता, सबको हटाता बाहर आया
"अंकल, सारे कागज़ ले आना
खाता खुल जायेगा,रिस्पेक्ट्फुल्ली अपना पासबुक ले जाना
कहाँ आप जैसा, सीनियर सिटिजन ,रेस्पेक्टेड पर्सन, खाता खुलवाने
भीड़ में धक्के खाता फिरेगा, अपुन इधरिच मिलेंगा"
मेरी तो ऑंखें छलकने को हो आयीं
किसी संस्कारित घर का चश्मेचिराग है
"बहुत बहुत धन्यवाद बेटा जुग जुग जियो
कागज़ जुटाने में टाइम तो लगेगा
लेकिन मेरा खाता अब लगता है जरूर खुलेगा
अच्छा तो हम चलते हैं , राम राम "
(4)
ज्योंही मुड़ा,कंधे पर युवक का हाथ पड़ा
"अंकल, हंड्रेड रुप्पीज ,प्लीज़"
मैं अचकचाया "बेटा खाता खुलेगा तब न "
"माई डियर अंकल, अपुन का सर्विस चार्ज "
"कैसा सर्विस चार्ज?"
"ओये बुड्ढे - काए कू खाली पीली बोम मारता
सुबू सुबू भेजा नई ख़राब करने का......क्या ?
घंटे भर से तेरे पिच्छू पिच्छू घंटा हिला रिया
फारम फोटू सब कर रिया
अब मजूरी देने में पिछाड़ी दिखा रिया
बोले तो ...फटने लगी”
अचानक जाने कहाँ से भीड़ जुटने लगी
मुझे थरथरी छूटने लगी
चश्मेचिराग ने कन्धा छोड़ कालर पकड़ लिया
डर के मारे कांपने लगा,जैसे सन्निपात ने जकड़ लिया
लोग क्या है क्या है करते हुए जुटने लगे
"अरे कोई नई, यार,ये हलकट बुड्ढा,घंटे भर से,तंग कर रिया है
काम करा लिया मजूरी से मुकर रिया है"
"पर मेरा खाता तो अभी खुला नहीं "
"ओये अंकल की दुम ,अक्कल से पैदल क्या तुम,कागज लाने का तब्बी तो खाता खुलवाने का
मेरे कू कागज दे अब्बी के अब्बी,चोपड़ी ला के तेरे मूँ पे मारा नईं
अपुन का नाम सिकंदर दारा नईं"
जनमत का सम्मान किया- गाँधी छाप का दान किया
"थैंक यू वेरी मच अंकल " युवक ने बाकायदे हाथ मिलाया
हैण्ड पाइप के हैंडिल की तरह हाथ पकड़ कर,ऊपर नीचे कई बारहिलाया
"वैसे मोस्ट रेस्पेक्टेड सर, खाता खोलने कू मालकित्ता लाये थे ?"
"दारा सिंग जी हम तो यही सौ रूपया काट कूट कर जुटा पाए थे"
"तो भूतनी के- सुन,जल्दी फूट,उदिर कू,पतली गली है
अबे हियाँ तेरे जैसे,झंडू का काम नईं,
दस हजार से,खाता खुलता है
मल्टीनेशनलबैंक है,बड़ा बैंक है,
हेड आफिस,इटली है
ओक्के - - -हैव अ वेरी नाईस डे सर, बाई बाई"
मैं कुछ भी नहीं बोल पाया ,
किसी बड़े बैंक में खाता
अभी तक नहीं खोल पाया .
No comments:
Post a Comment